उत्तराखंडदेहरादून

उत्तराखंड में महंगी होगी शराब, नई आबकारी नीति पर मुहर; फ्लेवर्ड वाइन्स का हब बनेगा प्रदेश

उत्‍तराखंड की धामी कैबिनेट ने नई आबकारी नीति को मंजूरी दे दी। आबकारी राजस्‍व लक्ष्‍य 4000 हजार करोड़ से बढ़ाकर 4400 करोड़ कर दिया गया है। जोकि पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में करीब 11 फीसदी अधिक है। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए सरकार ने करीब 4000 करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा था। जिसके सापेक्ष करीब 80 फीसदी राजस्व एकत्र हो गया है। उत्तराखंड आबकारी नीति विषयक नियमावली 2024 में मिलावटी शराब को रोकने, बड़े ब्रांड के शराब की उपलब्धता पर जोर के साथ-साथ राजस्व बढ़ाने को लेकर तमाम प्रावधान किए गए हैं। नई आबकारी नीति में राज्य की कृषि एवं बागवानी से जुड़े किसानों के हितों को देखते हुए देशी शराब में स्थानीय फलों (कीनू, माल्टा, काफल, सेब, नाशपाती, तिमूर, आडू आदि) को शामिल किया गया है। साथ ही शराब दुकानों का आवंटन या नवीनीकरण, दो चरणों के तहत लिया जाएगा।

नई आबकारी नीति

  • शराब की पुरानी दुकानों को उसी अनुज्ञापक को 10 प्रतिशत वृद्धि के साथ नवीनीकरण करने की व्यवस्था।
  • जिन दुकानों का नवीनीकरण नहीं होगा, उनका लाॅटरी या नीलामी के साथ ही पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर आवंटन किया जाएगा।
  • नीति में विदेशी मदिरा की बॉटलिंग के लिए आबकारी राजस्व और निवेश के लिए पहली बार प्रावधान किया जा रहा है।
  • उत्तराखंड के मूल, स्थायी निवासियों को रोजगार देने के लिए भारत में निर्मित विदेशी मदिरा की आपूर्ति के थोक व्यापार की व्यवस्था का प्रावधान ।
  • पहली बार ओवरसीज मदिरा की आपूर्ति के लिये थोक व्यवस्था का प्रावधान किया है।
  • कृषि एवं बागवानी से जुड़े किसानों के हितों को देखते हुए देशी शराब में स्थानीय फलों कीनू, माल्टा, काफल, सेब, नाशपाती, तिमूर, आडू, आदि को शामिल किया गया है।
  • शराब की दुकान आवंटन में लिए आवेदक को आवेदन पत्र के साथ पिछले दो साल का आईटीआर देना होगा।
  • पूरे प्रदेश में एक आवेदक को अधिकतम तीन शराब की दुकानें ही आवंटित की जा सकेंगी।
  • प्रदेश के सभी जिलों में चल रही मदिरा दुकान के सापेक्ष उप दुकान खोले जाने की मंजूरी भी राजस्व बढ़ाने को लेकर दी जा सकेगी।
  • पर्यटन प्रोत्साहन और स्थानीय रोजगार को देखते हुए पर्वतीय तहसील और जिलों में मॉल्स डिपार्टमेंटल स्टोर में मदिरा बिक्री का आवेदन शुल्क 5 लाख रुपए और न्यूनतम क्षेत्रफल 400 वर्गफुट का प्रावधान।

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